Tuesday, May 18, 2010

दंतेवाड़ा नक्सली नरसंहार


..ऐसे तो मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन होगी जीत
(18th May 10)
विजय कुमार झा
न्यूज़ एडिटर
नक्सलियों ने दंतेवाड़ा जिले में सोमवार की शाम एक बार फिर खूनी खेल खेला और 44 लोगों की जान ले ली। नक्सली हिंसा में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में आम नागरिकों के मारे जाने की यह संभवतः पहली घटना है। यह सरकार को नक्सलियों की खुली चुनौती है। ताजा घटना से नक्सलियों से लड़ाई के लिए सरकार की तैयारियों का भी अंदाज मिलता है। सरकार सोचती है और नक्सली कर के दिखा रहे हैं।

करीब डेढ़ महीने पहले ही नक्सलियों ने इसी इलाके में 76 जवानों को एक साथ मार कर सुरक्षा बलों को सबसे बड़ा झटका दिया था। उसके बाद भी वे इलाके में तीन-चार छोटी वारदात अंजाम दे चुके थे। कुल मिला कर नक्सलियों की मंशा सरकार को यह सन्देश देने की लगी है कि वे सरकार से डरे नहीं हैं और अपने 'मिशन' पर डटे हैं।

इस बार इतनी बड़ी संख्या में आम नागरिकों को निशाना बना कर नक्सलियों ने भी जोखिम लिया है। जो कुछ लोग उनसे सुहानूभूति रखते हैं, वे अपने रुख पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। यह निश्चित रूप से सरकार के पक्ष में जाएगा। बशर्ते सरकार तेजी से नक्सल प्रभावित इलाकों में लोगों का भरोसा जीतने की मजबूत पहल करे।

स्थानीय लोगों का भरोसा जीते बिना नक्सलियों से लड़ाई मुश्किल है और इसे जीतना तो नामुमकिन है। इसलिए लोगों का भरोसा जीतना लड़ाई का पहला मोर्चा होना चाहिए। ऑपरेशन ग्रीन हंट की सफलता का भी पहला सूत्र यही है। सरकार को चाहिए कि वह पहले नक्सल प्रभावित इलाके में विकास कि पहल करे, फिर जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाये और तब लोगों का सहयोग लेकर नक्सलियों की ताकत कुचल दे।

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